Tuesday, August 23, 2016

Model / actress Aliza Kim revert to islam - hindi

नव मुस्लिम Dawa Queen सेल्‍फी की शौकीन एलीजा किम फेसबुक पर एक्टिव रहती हैं एजीला अपने फेसबुक नोट में बताती हैं कि "मैं ईसाई थी, धार्मिक ईसाई परिवार से संबंध है और अमेरिकी समाज के हिसाब से अच्छी धार्मिक लड़की थी। ईसाई ऐसा बहुत कुछ कर सकते हैं जो मुसलमान नहीं कर सकते तो इस्लाम से पहले मेरा काम कुछ गैर इस्लामी था, अमेरिकी मॉडल और एक्ट्रेस थी, लेकिन पार्टियों में जाना और बुरा काम करने वाली नहीं थी। मुझे हमेशा से भगवान के अस्तित्व पर विश्वास था और इबादत में डूबी रहने वाली ईसाई थी, लेकिन मुझे हमेशा किसी ऐसी चीज़ की तलाश थी जो अधिक पवित्रता, अधिक प्राकृतिक सत्य हो। जीवन के संकट ने मुझे जीवन के उद्देश्य की खोज के लिए मजबूर किया, ईसाई धर्म में ही सच्चे धर्म की खोज की लेकिन न मिल सकी।
''अमेरीका में पैदा हुयी एलीजा ने भविष्य बनाने के लिए बाधाओं के बावजूद, स्कूल में उत्कृष्ट प्रदर्शन से शैक्षणिक छात्रवृत्ति जीती, अर्थशास्त्र और समाजशास्त्र में डबल स्नातक डिग्री और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में मास्टर्स डिग्री प्राप्त की। बचपन से शिक्षा में बहुत दिलचस्पी थी सो धार्मिक दिलचस्‍पी के कारण इस विषय पर भी रिसर्च (अनुसंधान) किया। बाइबिल और ईसाई धर्म के बारे में ऐतिहासिक पुस्तकें पढ़ना शुरू किया। दर्जन से अधिक देशों की यात्रा कर चुकी अलिज़ा किम को बाइबिल के प्राचीन नुस्खों में इतनी रुचि हुई कि आखिर मैं हज़रत इसा मसीह की भाषा आरामि (इब्रानी) भी सीख डाली और आखिरकार यह जाना कि बाइबल को अंग्रेजी अनुवादों में कितना विकृत किया गया। जब ईसाई थी तब भी मुझे विश्वास था कि Trinity पवित्र त्रिदेव का विश्वास जो ईसाई धर्म का महत्वपूर्ण हिस्सा है सही नहीं (अर्थात "एक में तीन" और "तीन में एक"। ईसाई ईश्वर को एक ही मानते में मगर एक में तीन हस्तियों को शामिल करते हैं।) ईश्वर और मसीह अलैहिस्सलाम दो अलग हस्तियां हैं। यीशु का सूली पर चढ़ाया चढ़ाया जाना एक दूसरा ऐसा मुद्दा था जिस पर मैं ईसाई धर्म से सहमत नहीं थी।

मलेशिया में सेटल होने के बाद ईसाई धर्म के बाद मैं दूसरे धर्मों को देखा, इस्लाम के बारे में मुझे पता था कि यह भी इब्राहीम धर्मों abrahamic religions के अंतर्गत आता है इसी बात ने मुझे इसके अध्ययन की इच्छा हुई और मैंने इसे पढ़ना शुरू किया, बिना रूके पढती गयी, अंततः अल्हम्दु लिल्लाह ईश्वर की सच्चाई इस्लाम में मिली जिसकी मुझे तलाश थी। अल्लाह की नवाज़िश है कि मैं ऐसे घर में पली थी जहां लोगों से नफरत करना सिखाया नहीं गया था, न ही सब कुछ नकारात्मक दृष्टि से देखने के लिए प्रशिक्षित किया गया इसीलिए इस्लाम के बारे में वैसा नहीं सोचती थी जैसा अमेरिकी मीडिया दिखाता है । इस्लाम स्वीकार करने के बाद मैं कह सकती हूँ कि इस्लाम कितना शांतिप्रिय, सकारात्मक और सुखद धर्म है और हर मामले में दूसरे हर धर्म से अच्छा है। मुझे हमेशा से एक संगठित Organized जीना पसंद था, जीवन की हर चीज में मनमानी नहीं करना चाहती थी, यह दर्शन गलत है क्योंकि हो सकता है आप कुछ गलत करना चाहें सो मुझे रोक टोक बुरी नहीं लगती, यह जीवन को दिशा देती है, इस्लाम लाकर पांच नमाज़ें पढ़ना एक चुनौती थी, जो मनुष्य आदी न हो इसके लिए यह मुश्किल होगा, अरबी भाषा में नमाज़ याद करना मेरे लिए बहुत मुश्किल था, लेकिन अल्हम्दु लिल्लाह यह सब खुशी खुशी किया, यह सब मुझे बहुत सकून देता है, क्योंकि मुझे पहले ही अल्लाह की इबादत का शौक था और यह याद रखना कि यह सब मुझे अल्लाह का प्यार देगा इससे बढ़कर क्या होगा? मझे नमाज़ का समय बहुत खुशी देता है क्योंकि यह अल्लाह से मिलने का समय है। मुझे इस्लामी कपड़े और हिजाब में भी कोई समस्या नहीं हुई, वास्तव में मैं खुद को ढांपना पसंद है, इस्लाम से पहले भी मेरी माँ मुझे लंबी आस्तीन और लंबे पाजामे में ही देखना पसंद करती थीं, तो मैं इस समय भी काफी बेबाक नहीं थी। हिजाब आपको अपने पर भरोसा देता है,  इस्लाम लाने के बाद घर से निकलते समय यह सवाल आपके सामने नहीं होते कि आप कैसे सटाइलश लग रहे हैं लेकिन यह विचार होता है कि अल्लाह आप से खुश है या नहीं? यह एक बिल्कुल अलग प्रकार के भावनाओं की दुनिया है। और यह सब आप याद दिलाता है कि जीवन का एक उद्देश्य है आप यहाँ इसलिए हैं कि अल्लाह को खुश कर सकें, ताकि जब तुम परीक्षा अच्छी तरह पास करके भविष्य की दुनिया में जाएं तो आप के पास सब कुछ हो।मॉडलिंग और एक्टिंग कैरियर में लोगों की इच्छा का ख्याल रखना पड़ता है, सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीर पेश करते हुए में सोचती थी क्या लोगों को ये तस्वीर अच्छी लगेगी? और जितने लोग इस फोटो को लाइक / पसंद करेंगे। उसकी चिंता होती। क्योंकि इस पेशे में हर काम लोगों की इच्छा से करना पड़ता है। हिजाब के बाद मुझे खुशी इस बात की है कि लोग मेरे ज्ञान, बुद्धि और प्रतिक्रिया के आधार पर मुझे सराहते हैं न कि मेरी शक्ल व सूरत या बाहरी हुसन के आधार पर। जब भी इस्लाम के किसी भी आदेश का पालन कर लेती हूँ तो एक मीठा सा एहसास होता है कि अल्लाह की रजा हासिल कर रही हूँ और यह एहसास बहुत प्यारा है, यह बहुत ही प्यारा एहसास है।
टीवी और इन्‍टरनेट के जरिए इस्‍लाम को इसाईयों से परिचय कराने के इस जज्‍बे के कारण ही अपने उन्‍हें  Queen of The Deen  दीन की रानी कहते हैं।

Notable Reverts: Please Youtube these people. These are just a few people I found interesting but there are many more notable reverts who have shared their stories on Youtube that you can watch.
a. Yvonne Ridley, ex-Taliban captive and internationally acclaimed news correspondent.
b. Yusof Estes, former Christian preacher and entrepreneur.
c. Lauren Booth, Tony Blair’s sister-in-law and news correspondent formerly based in Gaza.
d. There have been many American military veterans who have reverted to Islam after serving in the Middle East. You can search for ‘American soldier Islam’ in Youtube.



नोटः यह लेख नेट पर उपलब्‍ध जानकारियों पर आधारित है.... मुहम्‍मद उमर कैरानवी
Model / actress Aliza Kim converted to islam
https://www.youtube.com/watch?v=1JfYQVdSPag

 Aliza Kim - Demo for women's self defense


Monday, August 22, 2016

क्रिस्टियाने बाकर एम. टी. वी. की पूर्व होस्‍ट मुसलमान हो गयी

क्रिस्टियाने बाकर का मुहब्‍बत ने साथ छोडा, लेकिन इमरान खान की दोस्‍ती के दिनों में आपसी बहस और धार्मिक पुस्‍तकों के अध्‍ययण से इस्‍लाम को इतना समझ लिया था कि उसने  इस्‍लाम ना छोडा, इसाई परिवार की यह मशूहर एम टी वी की पूर्व होस्‍ट Kristiane Backer  कुछ समय यहूदी परिवार के साथ भी रह चुकने के कारण काफी सवालों के जवाब की तलाश में थी, जिनके जवाब इस्‍लाम में पाकर मुसलमान हो गयी।
उलझन से भरे हुए दिनों में पूर्व Dr Coxon अर्थात नयी मुसलमान   मुस्लिम डॉक्टर अमीना  लन्दन की हार्ट स्ट्रीट में उनका क्लीनिक था उसके लिए एक चमत्कार साबित हुईं उन्‍हों ने इस मशहूर पत्रकार को समझाया कि तुम्‍हारी जिंदगी में इमरान का इतना ही रोल था वो तुम्‍हें इस्‍लाम से परिचित कराने आया था कर गया,  गम में डूबने के बजाये अब आगे बढो। बाद में इन दोनों ने एक साथ हज किया और रोज़ह रसूल पर उपस्थिति दी। 2006 में हज करने गयी वहां काले गिलाफ में काबा के सामने अमीर-गरीब, काले-गोरे किसी फर्क के बिना प्रार्थना करते देख कर बेहद खुश हुयी।
  She Converted to Islam in April, 1995 in a Mosque in London
अक्‍सर अपनी बातों में इमरान खान के साथ बिताये समय की बातें ताजा करती रहती हैं, 1992 में विश्‍वकप जीतने पर टीवी के लिए इमरान खान का इन्‍ट्व्‍यू के लिए मुलाकातें हुयी, प्रेम हो गया, लेकिन इमरान खान किन्‍हीं शंकाओं में घिरकर जेमिमा से विवाह कर लिया था ।


क्रिस्टीन का कहना है कि इमरान खान उन दिनों में बहुत नियमित ... हम सबसे अलग होकर पांचों वक्त की नमाज पढ़ता था। रमज़ान में पूरे उपवास रखता था ...  वह पूरी तरह से शराब से परहेज करता था। वह हर समय मुझे इस्लाम की ओर आकर्षित करने की कोशिश करता रहता था ... एक बार सीरते रसूल अल्लाह मुझे पढ़कर सुना रहा था तो वह रोने लगा ... मेरे लिए यह एक झटका था ... भावनायें जिसके चेहरे पर स्पष्ट नहीं होती थीवह इमरान कैसे बेखुद होकर आंसू बहा सकता है। मैं कारण पूछा तो उसने कहा '' क्रिस्टीन मुझे अपने पैग़म्बर से इतनी मुहब्बत है कि उनके संबंध से मेरी आँखें आँसुओं से भर जाती हैं '' ... क्या आप अभी भी मुझे दोषी ठहरा सकते हैं कि मेरी दृष्टि में इमरान खान की प्रतिष्ठा इस पुस्तक के पढ़ने से अधिक ऊंची हो गयी। एक बार क्रिस्टीन कुछ 'अवधि बाद इमरान के लंदन के फ्लैट में जाती है ... कड़ाके की ठंड है और सेंट्रल हिटिंग  काम नहीं कर रही और वह  हीटर जलाने के लिए तीली रौशन करती है। एक लौ भड़कती है जो पूरे फ्लैट को अपनी चपेट में लेकर जला डालती है। कर क्रिस्टीन अपनी जान बचाती है लेकिन चिंतित है कि जब इमरान को बताना चाहूंगी कि मेरी कोताही के कारण उसका  भव्य फ्लैट राख हो चुका है तो वह मुझे कभी माफ नहीं करेगा ... कुछ समय बाद वह हिम्मत करके उसे फोन करती है और फ्लैट की आग के बारे में डरते डरते खबर करती है तो इमरान की प्रतिक्रिया उसे हैरान कर देती है। वह निहायत मुहब्‍बत से कहता है बहुत अच्‍छा हुआ कि मेरे गुनाहों की गवाह चीजें खतम हो गयीं।
 केंसर हास्पिटल बनवाने जैसे काम इमरान खान के मुहम्‍मद साहब साहब प्रभावित होने की गवी देते हैं
German Author Kristiane Backer on Pakistan, Islam & Imran Khan
 इमरान खान के साथ बुल्‍हे शाह के कलाम  से परिचित हुयी उनके कलाम से बेहद सुकून पाती,  यह पंक्तियां उन्‍हें बेहद पसंद आती हैंः 

पढ़ पढ़ कर आलम फ़ाज़िल गया,
कभी अपने आप को पढ़ा ही नहीं,
मस्जिद और मंदिरों में तो चला जाता है,
कभी अपने अंदर झांक कर देखा है नहीं
यूं ही रोज शैतान से लड़ता है
कभी अपने नफ्स से लड़ा ही नहीं,
बुल्ले शाह आसमानों की बातें करते हो
लेकिन जो दिल में है उसे परखा ही नहीं।


 अमेरिकी उपन्यासकार ने एक बार क्रिस्टीना बेकर से सवाल किया कि जब उन्होंने इस्लाम कबूल किया तो उनके समाज, लोगों और मीडिया का क्या प्रतिक्रिया थी? क्रिस्टीना बेकर ने सवाल के जवाब में कहा कह''में अपने माता पिता से शुरू करती हूँ। उन्होंने मुझसे कहा कि तुम इमरान खान से शादी नहीं कर रही तो उसका धर्म क्यों अपनाना चाहती हो? तो मैंने जवाब में कहा कि देखिए! आप धर्म का फैसला किसी दूसरे को नहीं देख सकते। आप को गहराई में देखना पड़ता है। मैंने इस्लाम इमरान खान की वजह से नहीं अपनाया, इमरान ने तो बस इस्लाम का परिचय करवाया था।

क्रिस्टीना बेकर ने निजी टीवी कार्यक्रम में बातचीत करते हुए कहा कि मीडिया मेरे स्वीकृति पर रिएक्शन काफी नकारात्मक था और वे इसे नकारात्मक तरीके से पेश कर रहा था। मीडिया का कहना था कि '' यह बुद्धि खो बैठी है '' मीडिया ने मेरे बारे में बहुत अजीब बातें की कि आतंकवाद फैलाना चाहती हूँ? । क्रिस्टीना बेकर ने कहा कि 1995 में जर्मन अखबारों की हेड लाइन बनकर प्रकाशित हुई। मुझे संतोष है कि में मुसलमान हूँ,  बहुत कठिनाइयों उठायीं लेकिन अल्लाह के करम से सब हल हो गई।


'एमटीवी से मक्का तक' की कहानी Book

एमटीवी से मक्का तक - जर्मनी की पहली एमटीवी वीजे क्रिस्टियाने बाखर की बहुत ही व्यक्तिगत किताब है. उन्‍हों ने पाकिस्तान के सबसे मशहूर क्रिकटर इमरान खान की वजह से.1995 ने इस्‍लाम कुबूल किया,


क्रिस्टियाने बाकर
Kristiane Backer
हैमबर्ग की क्रिस्टियाने बाकर ने वह जिंदगी जी है जो दुनियाभर के लाखों युवा जीना चाहते हैं. 43 साल की क्रिस्टियाने एमटीवी में वीजे रहीं. इसके अलावा उन्होंने कई दूसरे टीवी चैनलों पर भी कई शो पेश किए. मॉडोना हो या माईकल जैक्सन, ब्रैड पिट या टॉम क्रूस, क्रिस्टियाने की मुलाकात सबसे हुई. क्रिस्टियाने की जिंदगी बस एक बड़ी पार्टी थी, कभी कुछ घंटों के लिए एक शहर में फिर कुछ घंटों बाद दूसरे शहर में. क्रिस्टियाने बहुत ख़ूबसूरत हैं. ऊंची और छरछरी कद काठी, भूरे बाल और शालीन व्यक्तित्व. लेकिन अंदर से क्रिस्टियाने खालीपन महसूस करने लगी. उन्होने अपनी डायरी में लिखा है,

"मैं इतना बुरा महसूस कर रही हूँ जितना शायद पहले कभी नहीं किया. हर दिन मैं इतना काम करती हूँ, लेकिन मैं अकेले ही होतीं हूं. किस दिशा में मेरी ज़िंदगी जा रही है, कुछ समझ नहीं आ रहा है."

फिर क्रिस्टियाने की मुलाकात
लंदन में इमरान खान से हुई. किस्मत समझिए या संयोग -दोनों में प्यार हो गया. क्रिस्टियाने शादी और अपने एक परिवार पाने का सपना संजोने लगीं. इमरान के साथ वह क़ुरआन भी पढ़ने लगी और बार इमरान उन्हें पाकिस्तान भी लेकर गए. क्रिस्टियाने के लिए यह एक बिल्कुल नई दुनिया थी.

"इस्लाम में पहली चीज़ तो यह है कि हर दिन कई बार नमाज़ पढ़ने से ईश्वर के साथ रिश्ता बहुत गहरा हो जाता है. बंदा पांच बार नमाज़ पढ़ता है और अपने आपको बार-बार ईश्वर से जोड़ता है. इससे आध्यात्मिकता बहुत सहज और सुगम हो जाती है. ईसाइयत में वह इतनी सुगम नहीं है. यह बात भी है कि अतीत में ईसाई चर्च के विभिन्न धार्मिक सिद्धांत ठीक से मेरे पल्ले नहीं पड़ रहे थे-- जैसे, ईसाइयत में त्रिमूर्ति या त्रिदेव वाला सिद्धांत. मुझे यह बात भी जंचती है कि इस्लाम में बच्चा जन्म के समय हर पाप से मुक्त होता है. मैं ईसायत की इस बात को समझ नहीं पाती कि कोई बच्चा शुरू से ही पापों का गठरी ले कर पैदा होता है. इस तरह, तार्किक और बौद्धिक दृष्टि से इस्लाम को मैं कहीं बेहतर समझ पाती हूं. इसमें लोगों से मिली उस आत्मीयता का भी बहुत बड़ा हिस्सा है, जिनसे मैं मिली हूं."

क्रिस्टियाने अब लंबे कपड़े पहनने लगी थी. छोटे मिनी स्किर्ट या टॉप नहीं. वह स्वीकार करतीं है कि इमरान खान अपना कैंसर अस्पताल बनाने के काम में व्यस्य रहने की वजह से उनको ज़्यादा वक्त नहीं दे पाते थे. उनके मां बाप और दोस्तों को शक होता है लेकिन क्रिस्टियाने इमरान खान पर अपने विश्वास के साथ उनके शक को दूर कराती रही. लेकिन जब अचानक इमरान खान ने उनके साथ रिश्ता तोड़ दिया तब क्रिस्टियाने को सदमा लगता है. कुछ समय बाद उनकी शादी फिर जेमाईमा गोलडस्मिथ से हो जाती है. क्रिस्टियाने का सपना अधूरा रह जाता है. फिर भी वह 1995 में इस्लाम को कबूल करती हैं. उनका कहना है कि उन्होंने इमरान खान को माफ़ कर दिया क्योंकि इमरान ने उनको एक रास्ता दिखाया जो बहुत ज़रूरी था. ख़ासकार जर्मन मीडिया में इस बात को लेकर काफी विवाद उठे. एक टीवी चैनल के साथ क्रिस्टियाने का कॉनट्रैक्ट भी रद्द कर दिया गया और क्रिस्टियाने को बहुत सी खरी खोटी बातें भी सुननी पड़ीं. क्रिस्टियाने का मानना है कि इस्लाम के नाम पर किए गए हमलों की वजह से दुनियाभर में इस्लाम को शक की नज़र से देखा जाता है.

"मैं समझती हूं कि जब से ईसाई योद्धा धर्मयुद्ध के नाम पर येरुसलेम को हथियाने और कथित दुष्टमुसलमानों के होश ठिकाने निकले थे, तभी से यह मिथ्या प्रचार चल रहा है. या शायद तब से चल रहा है, जब तुर्क विएना तक पहुंच गये थे. अपरिचित लोगों से डर का हमेशा कोई ऐतिहासिक कारण होता है. लेकिन, मैं यह नहीं समझ पाती कि गौएटे के समय, जब पूर्वदेशीय साहित्य ने यूरोप में रोमैंटिक आन्दोलन को प्रेरणा दी, गौएटे, लेसिंग, शिलर तक जब उससे प्रेरित हुए, तब, मेरा अनुमान है कि हमारे यहां कहीं अधिक खुलापन था. कम से कम सांस्कृतिक धरातल पर दूसरे धर्मों और संस्कृतियों के प्रति कहीं अधिक समझबूझ थी."

क्रिस्टियाने इस बात पर ज़ोर देतीं हैं कि वह लोगों का धर्म परिवर्तन नहीं करना चाहतीं हैं या इसलाम का महिमामंडन कतई नहीं करना चाहती हैं. उनका अपना रास्ता है और इस रास्ते ने उनको अपनी असली पहचान तक पहुंचाया. पांच बार दिन में नमाज़ पढ़ना, शराब न पीना, सभी धार्मिक और व्रत के दिनों का पालन करना, गरीबों को दान देना- क्रिस्टियाने का कहना है कि यह सब उनको सहारा देता है.

"मेरी इस किताब के जरिए यही कामना है कि मैं लोगों को अपना आध्यात्मिक पक्ष जानने के लिए प्रेरित कर सकूं. लोग अपना मन और अपना दिल खोलें. दूसरी और इस्लाम के प्रति जो पूर्वाग्रह हैं मैं उनको कम करने में योगदान देना चाहती हूं. मै दो अलग संस्कृतियों के बीच पुल बनाना चाहती हूं, क्योंकि मैं अब दोनों को जानती हूँ. मै एक समवाद पैदा करना चाहती हूँ."

इस्लामी दुनिया के मशहूर कवि और रहस्यवादी जलालुद्दीन रूमी और अल्लामा इकबाल के लेखन को पढ़ना क्रिस्टियाने को बहुत अच्छा लगने लगा. वह अरबी भी सीखने लगी. होमेओपाथी की भी पढ़ाई की. हज पर भी
गईं. साथ ही कई मुस्लिम देशों की यात्रा भी उन्होंने की. इसके बाद उन्होंने एक जर्मन इस्लामविद् के साथ शादी की. लेकिन यह शादी भी टूट गई. फिर एक ऐक्सक्लूसिव वेबसाईट और दोस्तों के ज़रिए क्रिस्टियाने की मुलाकात मोरोक्को के मशहूर टीवी जर्नलिस्ट रशीद जफार से हुई. जल्द ही दोनों शादी करने के सोचते हैं. एक बार फिर क्रिस्टियाने एक सपना देखतीं हैं. लेकिन शादी के बाद रशीद उन पर बहुत ज्यादा बंदिशें थोपने लगे. और इस तरह दो अलग संस्कृतों के बीच का फ़ासला शादी में अड़चन बनने लगा.

"एक दूसरे का आदर करना सबसे महत्वपूर्ण है. दूसरे को समझने की कोशिश होनी चाहिए, एक खुलापन होना चाहिए. दूसरे के इतिहास को समझना बहुत ज़रूरी है. मैं एक दिन में तो अरबी महिला नहीं बन सकतीं हूं, चाहे मैं कितनी भी कोशिश करूं. मेरे पति ने मुझे शादी के पहले नहीं बताया था कि उसे यह पसंद नहीं कि मैं अन्य पुरूषों के साथ संपर्क में रहूं और वह यह चाहते थें कि एक न एक दिन मैं काम करना बंद कर दूं. चलो, मेरी यह शादी भी सफल नहीं रही. लेकिन ऐसा मैं अपने साथ दोबारा नहीं होने दूंगी."

क्रिस्टियाने की किताब आने के बाद यह भी कहा गया कि वह बहुत भोली है, खासकर यह देखते हुए कि कई मुस्लिम देशों में महिला अधिकारों का उल्लंघन होता है. इस पर क्रिस्टियाने का कहना है कि आम तौर पर यह कहना गलत है कि कि इस्लाम महिला अधिकारों के खिलाफ है. इसलाम में तो कतई यह नहीं लिखा है कि कोई महिला किसी पुरूष से कम है. अगर ऐसा इस्लामी देशों में देखने को मिलता है तो वह इसलिए क्योंकि वह धर्म और संस्कृति की व्याख्या अलग तरीके से करते हैं. क्रिस्टियाने का कहना है कि वक्त ने उसको शांत बनाया. आज वह एक ट्रैवल चैनेल के लिए एक शो पेश करतीं हैं और अंतरराष्ट्रीय चैनल एब्रू टीवी के लिए एक शो भी करती हैं जिसका नाम है „Matters of Faith“. इस वक्त क्रिस्टियाने अकेली रहतीं लेकिन उन्हें उम्मीद है कि एक ना एक दिन उन्हें एक सच्चा साथी मिलेगा. इन्‍शा अल्लाह.
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Kristiane is a Practising Homeopath
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Urdu Article
ایم ٹی وی سے مکہ تک‘‘، کرسٹیانے باکر کی نئی کتاب


English Book "from MTV to Makkah" Downlaod
en.ali3jaz.com/uploads/28f36c6214fa13cfdf4480efbcdc1848.pdf

उर्दू अनुवाद रिलीज 'एम टीवी से मक्‍का तक'


Wednesday, August 17, 2016

मुहम्मद लिखते पढ़ते नहीं थे इस (क़ुरआन) से पहले

मुहम्‍म्‍द सल्‍ल. को अनपढ समझने वाले जान लें कि कुरआन की बातों को सबसे बहतर कुरआन ही से जाना जा सकता है,  मुहम्‍मद सल्‍ल. की पढाई लिखाई  illiteracy बारे में विभिन्‍न आयतों से बात साफ हो जाती है, जैसे किः

 और (ऐ रसूल) क़ुरआन से पहले न तो तुम कोई किताब ही पढ़ते थे और न अपने हाथ से तुम लिखा करते थे ऐसा होता तो ये झूठे ज़रुर (तुम्हारी नबुवत में) शक करते (कुरआन 29:48) 
 और कहतेः
"ये अगलों की कहानियाँ है, जिनको उसने लिख लिया है तो वही उसके पास प्रभात काल और सन्ध्या समय लिखाई जाती है।" (कुरआन25:5)
आपकी परवरिश अपनों के बीच हुयी, आपके बारे में वो देखते आ रहे थे,  जानते थे कि आप लिखते पढते ना थे,  अल्लाह ने क़ुरआन का अग़ाज़ पेगम्‍बर मुहम्‍मद सल्‍ल. को कंठस्‍थ कराने का सिलसिला अपने फरिश्‍ते द्वारा शब्द इक़रा अर्थात पढ़ो से कराया।
Iqra! – The First Lesson of the Qur’an
"Read: In the name of thy Lord Who createth", (96:1)
   अपने परवरदिगार का नाम लेकर पढ़ो जिसने हर (चीज़ को) पैदा किया (96:1)


वही है जिसने उम्मियों में उन्हीं में से एक रसूल उठाया जो उन्हें उसकी आयतें पढ़कर सुनाता है, उन्हें निखारता है और उन्हें किताब और हिकमत (तत्वदर्शिता) की शिक्षा देता है, यद्यपि इससे पहले तो वे खुली हुई गुमराही में पड़े हुए थे, - (62:2)

 जिसने क़लम के ज़रिए तालीम दी (96:4) उसीने इन्सान को वह बातें बतायीं जिनको वह कुछ जानता ही न था(96:5)

 उसका जमा कर देना और पढ़वा देना तो यक़ीनी हमारे ज़िम्मे है (75:17)
ummi :
 कुरआन में उम्मी शब्‍द का अर्थ अनपढ़ नहीं बल्कि बिना ईश्वरीय किताब वाले से है जैसा कि यहूदी कहते थे कि हम ईश्वरीय किताब(बाईबल) वाले हैं और अरबों पर कोई किताब नहीं आई इसलिए यह उम्मी हैं।
"अब यदि वे तुमसे झगड़े तो कह दो, "मैंने और मेरे अनुयायियों ने तो अपने आपको अल्लाह के हवाले कर दिया हैं।" और जिन्हें किताब मिली थी और जिनके पास किताब नहीं है(ummi), उनसे कहो, "क्या तुम भी इस्लाम को अपनाते हो?" यदि वे इस्लाम को अंगीकार कर लें तो सीधा मार्ग पर गए। और यदि मुँह मोड़े तो तुमपर केवल (संदेश) पहुँचा देने की ज़िम्मेदारी है। और अल्लाह स्वयं बन्दों को देख रहा है (3:20)
उम्मुल्कुरा अर्थात बिना ईश्वरीय पुस्तक वालों की बस्ती का मरकज /सेंटर मक्का जिसे इंग्लिश में Mother of Cities कहते हैं। इस आयत को पढ़ें
"उसके बाद उन्हें छोड़ के (पडे झक मारा करें (और) अपनी तू तू मै मै में खेलते फिरें और (क़ुरआन) भी वह किताब है जिसे हमने बाबरकत नाज़िल किया और उस किताब की तसदीक़ करती है जो उसके सामने (पहले से) मौजूद है और (इस वास्ते नाज़िल किया है) ताकि तुम उसके ज़रिए से अहले मक्का (ummul qura) और उसके एतराफ़ के रहने वालों को (ख़ौफ ख़ुदा से) डराओ और जो लोग आख़िरत पर ईमान रखते हैं वह तो उस पर (बे ताम्मुल) ईमान लाते है और वही अपनी अपनी नमाज़ में भी पाबन्दी करते हैं "(6:92) 
उम्मी शब्‍द यहूदी बतोर तहकीर तुच्छ  के लिए किया करते थे,  कुरआन में उम्‍मी शब्‍द बतौर फखर के इस्‍तेमाल हुआ, अगर इसका अर्थ अगर अनपढ ही होता तो मक्‍का की उम्मुल्कुरा युनिवर्सिटी का नाम कुछ और होता
 
सुल्हे हुदैबिया में साबित है कि वो पढ़ना जान चुके थे वरना वो रसूल अल्लाह के बजाये कोई दूसरा शब्द काट देते और लिखना भी जान चुके थे उन्होंने इब्ने अबदुल्लाह लिखा था। 
मुहम्मद सल्लल्लाहु अलेही वसल्लम की नजर में लिखने पढ़ने की अहमियत इस बात से भी पता चलती है कि जंगे बदर में कैदियों को इस शर्त पर छोड़ा था कि वह कुछ मुसलमानों को लिखना पढ़ना सिखाएंगे।
           उपरोक्‍त बातों से बात साफ हो जाती है मुहम्‍मद सल्‍ल. कुरआन के अवतरित होने से पहले लिखते पढते नहीं थे और अल्‍लाह ने अपने पेगम्‍बर को शिक्षित किया।
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The Quranic word on which they proclaimed Muhammad's illiteracy was the word "ummi." They claimed that this Quranic word, which is spoken about Muhammad in the Quran, means illiterate! However, and contrary to their claims, the use of this word in the Quran consistently denotes the meaning of "gentile," or one who has never received a scripture [see 2:78, 3:20, 3:75, 62:2). The word "ummi" is never used in the Quran to mean "illiterate."
For the Quranic definition of the word "ummi" please see the following page:
The word "ummi" in the Quran


http://www.quran-islam.org/main_topics/misinterpreted_verses/ummy_(P1231).html

The issue of Muhammad's illiteracy
http://www.quran-islam.org/main_topics/new_information/muhammad_%28P1259%29.html

Sunday, August 7, 2016

फिरओन की लाश और डाक्‍टर मोरिस बोकाय की रिसर्च Hindi


फिरओन  "Pharao"   नाम नहीं बल्कि मिस्र के बादशाहों की उपाधि common title है  ऐसे लगभग 14 फिरआेन अर्थात मिस्र के बादशाहों के नाम मिलते हैं रामेसेस महान के उन्नीसवे वंश का तीसरा फिरआन "Pharao" (Ramesses II)  की लाश पर फ्रांस के  इसाई डाक्‍टर मोरिस बोकाय की  रिसर्च के कारण लगातार चर्चा में बना हुआ है।  रिसर्च करके उन्‍होंने माना कि यह वही फिरओन है जिसकी कुरआन में भविष्‍यवाणी की गयी थी कि अल्‍लाह इसकी लाश इबरत (Warning) के लिए सलामत रखेगा

धर्म ग्रंथ के सच्‍चे होने की एक निशानी यह भी होती है कि उसमें कही गयी बातें देर सवेर किसी तरह सच साबित होती हैं जैसे की फिरऔन बादशाह की लाश और कुरआन पर हुई रिसर्च के बाद इसाई दुनिया में तहलका मच गया था, स्‍वयं रिसर्च करने वाला मुसलमान हुआ या नहीं इस बात में शक हो सकता है लेकिन उसके सच बोलना पसंद करने कारण लाखों इसाईयों को इस्‍लाम की तरफ आने का कारण बना इस बात में कोई शक नहीं, फ्रांस जहां कि आज मुसलमानों की जनसंख्‍या दूसरे नंबर है इस रिसर्च के बाद फिर इसी डाक्‍टर कि पुस्‍तक The Bible,The Qur'an & Science से भी इसाई दुनिया इस्‍लाम की ओर आकर्षित हुई थी । इस रिसर्च के बाद इसाई और यहूदियों ने फिरऔन के अंत को अपनी धार्मिक किताबों में बदलना शुरू कर दिया, झूठा इतिहास तैयार करने का सबूत टेंथ कमांडेट फिल्‍म में फिरऔन को डूबता नहीं बल्कि जंग से महल वापस जाता दिखाया गया है।


थोडे थोडे समय बाद कुरआन अपना ईश्‍वरीय कलाम होना साबित करता रहा है जैसे इस लेख में जानेंगे कि फिरऔन का जिस्‍म और रिसर्च करने वाले डाक्‍टर ने सच्‍चाई को समझ कर बाकी जिंदगी कुरआन की सच्‍चाई से दूसरों को अवगत कराने में बिता दी।
मोरिस बुकाय (बोकाइले, Maurice Bucaille)  (जन्म 1920) फ्रेंच चिकित्सक थे, पेरिस  के अस्पताल में सर्जिकल में विशेज्ञ के रूप में काम करते रहे। प्रतिष्ठा का सबसे बडा कारण पुस्तक "बाइबल कुरआन और विज्ञान" है जिसमें आपने यह साबित किया है कि कुरआन की कोई बात वैज्ञानिक दृष्टिकोण के खिलाफ नहीं है, जबकि बाइबल की कई बातें आधुनिक वैज्ञानिक तथ्यों से गलत साबित होती हैं । यह फ्रेंच किताब बहुत लोकप्रिय हुई और कई उर्दू, इंग्लिश सहित कई भाषाओं में अनुवाद किया गया। इस्लामी दुनिया में किताब बहुत लोकप्रिय हुई और इस रिसर्च को  "ब्यूकलीज़म" नाम दिया गया।
फिरऔन की लाश के बाल भी अलगअलग दिखायी देते हैं अगर यह ममी होती तो तमाम हिस्‍से पर मेंहदी की तरह हडिडयों को सलामत रखने वाला मसाला लगा होता। 

Firon Body In France
फ्रांस के बारे में यह प्रसिद्ध है कि वह पुरातत्व का सबसे अधिक सरपरस्‍ती करने वाला देश है, जिस समय फ्रांस का प्रधान मंत्री फरांसू मीटारान François Mitterrand 1981 में हुआ तो उसने मिस्र से मिस्र के फिरऔन की लाश मांगी ताकि उस पर कुछ चिकित्सा अनुमान Archaeological tests and examinations किया जाये, अतः फिरऔन की लाश फ्रांस लाई गयी और जिस समय यह लाश फ्रांस के हवाई अडडा पर विमान से उतरी तो फ्रांस के प्रधानमंत्री ने उसका इस प्रकार स्वागत किया कि लगता था फिरऔन जिवित है तथा अब भी चीख रहा है कि मैं तुम सबका सब से बडा पालनहार हूं।

अतः शव फ्रांस के पुरातत्व सेन्टर ले जायगा गया ताकि बडे बडे चिकित्सक उसके बारे में गवेषण (रिसर्च) करें तथा अस्त्र चिकित्सकों के प्रधान मोरिस बुकाय थे। गवेषणा में मोरिस बुकाय का ध्यान इस पर था कि यह पता लगाया जाये कि इस फिरऔन का देहांत कैसे हुआ है जबकि दूसरे लोग कुछ और ही गवेषणा कर रहे थे। जांच से पता चला कि यह अर्थात जिसका यह शव है वो रात के अन्तिम समय में (डूब)जलमग्न हो कर मरा है क्यों कि उसके शरीर पर कुछ समुन्द्री नमक का भाग बाकी था। साथ ही साथ यह भी पता चला कि उसकी लाश डूबने के कुछ ही समय बाद निकाली गयी है। परन्तु आश्चर्य की बात यह है कि दूसरी फिरऔनी लाशों के अलावा इसकी लाश केवल इस प्रकार सुरक्षित क्यों बाकी है जब कि सारी लाशें समुंद्र से निकाली गयी हैं?

Bucaille in Egypt 
Thanks: 
http://www.bucaillelegacy.com/Bucaille%20in%20Egypt.htmमोरिस बुकाय सारे गवेषणा (रिसर्च) की प्रतिवेदन (फाइनल रिपोर्ट) लिख रहे थे कि अचानक एक आदमी ने उनके कान में चुपके से कहा कि जल्दी न करो मुसलमान लोगों का कहना है कि वह जलमग्न होकर मरा है। परन्तु मोरिस ने इस सूचना को बिल्कुल नकार दिया तथा आश्चर्य में पड गए कि इस प्रकार का ज्ञान बडी मशीनों से गवेषणा (रिसर्च) करने के बाद ही हो सकता है। फिर उसी आदमी ने कहा कि वह कुरआन जिस पर मुसलमान विश्वास करते हैं उसमें इसके जलमग्न होने तथा इसकी लाश के सुरक्षित रहने का वर्णन आया है। इस से उनका आश्चर्य और ही बढ गया तथा लोगों से पूछने लगे कि यह कैसे हो सकता है? जबकि इस लाश का गवेषणा लगभग दो वर्ष पहले 1898 में हुआ है जबकि उनका कुरआन 1400 सौ सालों पहले से है। यह बात बु़द्धि‍ में कैसे आ सकती है? जब कि केवल अरब ही नहीं बल्कि सारे के सारे मनुष्य कुछ वर्ष पहले मिस्र के पुराने लोग अपने फिरऔनों पर मसाला लगाना जानते हैं। 

मोरिस बुकाय पूरी रात बैठ कर ध्यान पूर्वक अपने मित्र की बात को सोचते रहे कि मुसलमानों के कुरआन में डूबने के बाद इस लाश के बचने का वर्णन आया है। जबकि तौरात में यह है कि फिरऔन उस समय डूबा है जब मूसा को भाग रहा था और इस में उसकी लाश के बारे में कोई चर्चा नहीं है।  अतः मोरिस अपने दिल में कहने लगे कि क्या यह बात बुद्धि में आने वाली है कि यह मेरे सामने जो लाश है यह वही मिस्र का फिरऔन है जिसने मूसा को भगाया है? तथा क्या यह बात बुद्धि में आने वाली है कि मुसलमानों का मुहम्मद सल्‍ल. यह बात एक हजार वर्ष से अधिक पहले जान जाये? और मैं अब जान पाया हूं।

मोरिस सो न सके तथा तौरात मंगाया। और तौरात में पाया कि जल ने फिरऔन की सारी सेना को लपेट लिया और उनमें से कोई न बचा। परन्तु मोरिस को बराबर आश्चर्य रहा कि पूरे तौरात में कहीं भी इसकी लाश के ठीक ठाक बच जाने का वर्णन नहीं मिलता है।
फिरऔन की लाश को चिकित्सा एवं सुधार के बाद फ्रांस ने फिरऔन के वैभव के अनुसार शीशे के ताबूत में भेज दिया। परन्तु मोरिस को उस बात के कारण जो उन्होंने फिरऔन की लाश के बारे में मुसलमानों की ओर से सुना था चैन न आया। इसी कारण सफर की तैयारी करके सउदी अरब में एक चिकित्सा महान सम्मेलन में भाग लेने के लिये गये जिस में बहुत से मुसलमान शव परीक्षा करने वाले भी भग ले रहे थे। वहां पर सबसे पहले मोरिस ने फिरऔन की शव के बारे में जो खोज लगाया था उसी का चर्चा किया। तुरंत एक मुसलमान ने कुरआन खोल कर ईश्वरीय वाणी दिखायाः

 "अतः आज हम तेरे शरीर को बचा लेगें, ताकि तू अपने बादवालों के लिए एक निशानी हो जाए। निश्‍चय ही, बहुत-से लोग हमारी निशानियों के प्रति असावधान ही रहते है।"॥ (कुरआन-10:92)  सुरह यूनुस
So today We will save you in body that you may be to those who succeed you a sign. And indeed, many among the people, of Our signs, are heedless (Quran-10:92)
 कुरआन की इस आयत का मोरिस पर बहुत बडा प्रभाव पडा तथा दिल में इस प्रकार आवेश पैदा हुआ कि सारे लोगों के सामने खडे होकर निसंकोच हो कर घोषणा कर दिया कि मैं ने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया तथा इस कुरआन पर विश्वास कर लिया।
मोरिस फ्रांस से वापस आये तथा लगभग दस वर्ष तक बिना किसी दूसरे कार्य के इस रिसर्च में लग गये कि आज के समय के नए वैज्ञानिक सिद्धांत एवं अनुसाधान कुरआन से कितना मेल खाते हैं। ताकि कुरआन की इस आयत का परिणाम उन्हें मिल सके।
 अब ये अत्याचारी जो कुछ कर रहे है, उससे अल्लाह को असावधान न समझो। वह तो इन्हें बस उस दिन तक के लिए टाल रहा है जबकि आँखे फटी की फटी रह जाएँगी, (Quran - 14:42)
कुछ ही वर्षों के बाद मोरिस ने फ्रांस में कुरआन के बारे में एक पुस्तक लिखी जिस से पूरी पश्चमी देश तथा पश्चीमी वैज्ञानिकों को हिला दिया। इस पुस्तक का नाम था ‘‘कुरआन, तौरात, इन्जील एवं ज्ञान नयी मर्म के अनुसार पवित्र पुस्तकों पर गवेषणा -कुरआन और नया चैलेंज-- 
The Bible, The Qur’an and Science… THE HOLY SCRIPTURES EXAMINED IN THE LIGHT
OF MODERN KNOWLEDGE
इस पुस्तक ने क्या किया? जैसे ही पहली बार छपी सारी दुकानों से तुरंत समाप्त हो गयी। फिर फ्रांसिसी भाषा से अरबी, इंग्लिश, इन्डोनेसी, फारसी, तुर्की, उर्दू, गुजराती, अलमानी आदि भाषा में अनुवाद होकर पुनः छापी गयी ताकि पूरब से पश्चिम तक सारे पुस्तकालय में उपलब्ध हो जाये।

यहां यह बात भी याद रहे कि मोरिस की इस पुस्तक पर यहूदी और इसाई धर्म के सारे वैज्ञानिकों ने खण्डन करने तथा उत्तर देने के प्रयास किया परन्तु किसी ने भी कोई ढंग की पुस्तक न लिखी दाये बायें बहुत चक्कर लगाया परन्तु कोई विशेष बात न लिख सके।

इस से आश्चर्य की बात यह है कि अरब इलाके के कुछ इसाई एवं यहूदी वैज्ञानिक ने भी खण्डन करने का प्रयास किया परन्तु जब मोरिस की पुस्तक को ध्यान पूर्वक पढने लगे तो मुसलमान हो गये।

Useful links:>>


डाक्‍टर मोरिस कहते थे "my choice is to tell the truth"
अर्थात मैं सच कहना पसंद करता हूं उनके काम पर आधारित वेबसाइट
http://bucaillelegacy.com/Maurice%20and%20the%20Pharaoh%20&From%20Microcosm%20to%20Macrocosm%20Award.html

 Read More: 
THE QUR’AN AND MODERN SCIENCE
Dr. Maurice Bucaille and other Scientists' Comments On The Qur'an
http://www.islamic-awareness.org/Quran/Science/scientists.html

Bible Quran Aur Science - Urdu Book
https://archive.org/details/BibleQuranAurScience_201307

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 Firon Body in Egypt Museum
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फिरओन और उस पर डाक्‍टर मोरिस की रिसर्च बारे में समझने के लिए देखें विडिया
https://www.youtube.com/watch?time_continue=202&v=XnwCWDX-stk



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"शीघ्र ही हम उन्हें अपनी निशानियाँ वाह्य क्षेत्रों में दिखाएँगे और स्वयं उनके अपने भीतर भी, यहाँ तक कि उनपर स्पष्ट हो जाएगा कि वह (क़ुरआन) सत्य है। क्या तुम्हारा रब इस दृष्टि, से काफ़ी नहीं कि वह हर चीज़ पर क़ाबू रखता है" (कुरआन-41:53)  http://tanzil.net/#trans/hi.farooq/41:53
उपरोक्‍त कुरआन की बात को जेहन में रखते हुए
फिंगर प्रिंट, कायनात, लोहा, आसमान ,बारिश, बच्‍चो का लिंग और कुरआन में गण्‍ितिय चमत्‍कार आदि विषयों को समझने के लिए देखें लगभग एक घंटे का विडियो
कुरआन के वैज्ञानिक चमत्कार  Scientific Miracles of Qur'an
https://www.youtube.com/watch?v=HOwPnfIDJcE


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क़यामत, जन्नत, 72 हूर ,गिलमा, महिलाओं का रिवार्ड पर एक दृष्टि

बेशक जन्नत में सब से प्रियतम और महान नेमत Blessings जो जन्नतवासियों को मिलेगी, वह अल्लाह का दर्शन (दीदार) होगा। अल्लाह ने अपने दर्शन के प्रति क़ुरआन करीम में सूचना दी है ''कितने ही चहरे उस दिन तरो ताज़ा और प्रफुल्लित होंगे – अपने रब की ओर देख रहे होंगे। '' (सूरःअल-क़ियामाः 23),
दूसरी सबसे बडी खुशी की बात उसकी रजा अर्थात अल्‍लाह का यह कहना कि अब वो कभी जन्‍नतियों से नाराज नहीं होगा।
इन दो नेमतों के बाद जो कुछ मिलेगा उसका कोई खास महत्‍व नहीं रह जाता।
जन्नत स्वर्ग में जाने से पहले हमें जानना चाहिए की
judgment day
दुनिया की हर चीज़ को खत्म होना है। क़यामत  महाप्रलय को रब ये दुनिया खत्म करके हिसाब के लिए नई धरती और आकाश बनाएगा। वही रब जो हर कुछ कर सकता है हम सबको अच्छे बुरे कामों का हिसाब देने के लिए ज़िंदा करेगा। 
वो हमें मरते ही सज़ा में गधा,घोड़ा या पेड़ पोधे नहीं बनाता क्यूँके हमने कुछ अच्छे काम ऐसे किये हैं जिनसे हमारे मरने के बाद क़यामत तक पिछले लाभान्वित होंगे उसका लाभ भी हमें देगा। 

ईश्वर से अच्छे कार्यो के इनाम में मिले स्वर्ग अर्थात जन्नत बहुत ही शान्दार, ऐशो आराम की जगह है, स्वादिष्ठ वस्तुओं से भरी हुई जगह है, अत्यन्त सुख- शान्ति का स्थान है, जहां दुःख और कष्‍ट का नाम भी नहीं होगा। लगभग सभी का धर्म विश्वास है कि स्वर्ग में पुण्यवान लोगों को दिव्य सुख, समृद्धि तथा भोगविलास प्राप्त होते हैं। अधिकतर विद्वानों  के अनुसार इस्‍लाम में स्‍वर्ग अर्थात जन्‍नत में जो स्‍त्री साथी मिलेगी उसे हूर कहते हैं,  जबकि जाकिर नायक कुरआन के अनुवादक मुहम्‍मद असद के हूर का अर्थ spouse और युसुफ अली का companion अर्थात साथी, पार्टनर के अर्थ में करने के हवाले से बताते हैं कि हूर का अर्थ हैं चमकदार आंखों वाला अर्थात इस गुण के साथ मर्द और महिला दोनों के साथी को हूर कहते हैं, यानि महिला को जो साथी मिलेगा वो चमकदार आंखों वाला होगा, वहीं पुरूषों को चकमदार आंखों वाली साथी मिलेगी।
शब्द हूर, अहवार (एक आदमी के लिए) और हौरा (एक औरत के लिए) का बहुवचन है. इसका मतलब ऐसे इंसान से हैं जिसकी आँखों को "हवार" शब्द से संज्ञा दी गयी है. जिसका मतलब है ऐसी आंखे, जिसकी सफेदी अत्यधिक सफ़ेद और काला रंग अत्यधिक काला हो.

Meaning of HoorThe word hoor is actually the plural of ahwar (applicable to man) and of haura (applicable to woman) and signifies a person having eyes characterized by hauar a special quality bestowed upon a good soul, male or female in paradise and it denotes the intense whiteness of the white part of the spiritual eye.
http://www.ilovezakirnaik.com/misconceptions/b08.htm

शब्द हूर पवित्र कुरआन में चार बार आता है, जैसे कि यहां:
''और (वहां) ऐसे साथी होंगे जिनकी सुन्दर, बड़ी एवं शोभायमान (चमकदार) ऑंखें होंगी.''
Thus shall it be. And We shall pair them with companions pure, most beautiful of eye. (Quran:
56:22)




Reward
जन्‍नत में पुरूस्‍कार के रूप छिपी हुई आंखों की ताजगी  :

और कोई नहीं जानता है कि उनकी आँख की ताज़गी के लिए क्या छिपा हुआ है, जो कुछ अच्छे कार्य उन्होंने किये हैं यह उसका पुरस्कार है. (सुरा: अस-सज्दाह, 32:17)

स्वर्ग का आशीर्वाद महिलाओं और पुरुषों के लिए एक जैसा हैं. वहाँ दो लिंग के बीच एक छोटा सा भी अंतर नहीं है. यह कुरआन से स्पष्ट है:
     नीचे दी गयी आयत पर क़ुरआन अनुवादकों की खुशी झलकती है पुरष्कार के लिए great reward - mighty reward - vast reward -  immense reward - mighty wage शब्द इस्तेमाल किये हैं


 ''मुस्लिम पुरुष और मुस्लिम स्त्रियाँ, ईमानवाले पुरुष और ईमानवाली स्त्रियाँ, निष्ठा्पूर्वक आज्ञापालन करनेवाले पुरुष और निष्ठापूर्वक आज्ञापालन करनेवाली स्त्रियाँ, सत्यवादी पुरुष और सत्यवादी स्त्रियाँ, धैर्यवान पुरुष और धैर्य रखनेवाली स्त्रियाँ, विनम्रता दिखानेवाले पुरुष और विनम्रता दिखानेवाली स्त्रियाँ, सदक़ा (दान) देनेवाले पुरुष और सदक़ा देनेवाली स्त्रियाँ, रोज़ा रखनेवाले पुरुष और रोज़ा रखनेवाली स्त्रियाँ, अपने गुप्तांगों की रक्षा करनेवाले पुरुष और रक्षा करनेवाली स्त्रियाँ और अल्लाह को अधिक याद करनेवाले पुरुष और याद करनेवाली स्त्रियाँ - - इनके लिए अल्लाह ने क्षमा और बड़ा प्रतिदान तैयार कर रखा है.'' [सुर: अल-अहज़ाब, 33:35]
Indeed, the Muslim men and Muslim women, the believing men and believing women, the obedient men and obedient women, the truthful men and truthful women, the patient men and patient women, the humble men and humble women, the charitable men and charitable women, the fasting men and fasting women, the men who guard their private parts and the women who do so, and the men who remember Allah often and the women who do so - for them Allah has prepared forgiveness and a great reward. (35)

गिल्‍मा   menservants
वहां जो मिलेगा वह ईश्वर का अहसान होगा, हमारा हक नहीं. दूसरी बात वहां किसी वस्तु की आवशयकता इस धरती की तरह नहीं होगी, जन्नत में बहुत ज़्यादा ऐश-आराम उठाने की वस्तु होगी जिसका मानव इस दुनिया में कल्पना भी नहीं कर सकता है। पूर्व और वर्तमान में राज-शाही जिन्‍दगी जीने के लिए सेवकों का होना बेहद आवश्‍यक  है 
प्रधान मंत्री और राष्ट्रपति के दोनों पद आधुनिक युग में पिछले राजा बादशाहों ही जैसे हैं 
इन पदों पर महिला और पुरुष दोनों रह चुके उनके सेवकों पर नज़र डालें अधिकतर पुरुष सेवक दिखाई देंगे महिला सेवक ना होने के बराबर देखेंगे। बड़ी हस्तियों के सेवकों के लिए भर्ती में तंदरुस्ती एवं पर्सनाल्टी अनिवार्य होती है।
इस लिए जन्नतवासियों की सेवा के लिए गिल्‍मा अर्थात सेवक उपस्थित होंगे जो जन्नत वासियों की खूब सेवा करेंगे। ऐ प्‍याले लिए हुए जिसके पीने के बाद न कोई बेहूदगी होगी न गुनाह पर उभारने वाली बातें,जैसा कि अल्लाह ने  क़ुरआन में बयान फरमाया हैः
"There they pass from hand to hand a cup wherein is neither vanity nor cause of sin. And there go round, waiting on them menservants of their own, as they were hidden pearls."
और हम उन्हें मेवे और मांस, जिसकी वे इच्छा करेंगे दिए चले जाएँगे वे वहाँ आपस में प्याले हाथों हाथ ले रहे होंगे, जिसमें न कोई बेहूदगी होगी और न गुनाह पर उभारने वाली कोई बात,  और उनकी सेवा में सुरक्षित मोतियों के सदृश किशोर दौड़ते फिरते होंगे, जो ख़ास उन्हीं (की सेवा) के लिए होंगे (कुरआन 52:22-24)


क़ौम लूत को बुरी आदतों  Homo Gay  की वजह से अल्लाह ने (क़ुरआन  11 :77- 79) तबाह कर दिया। दुनिया में ऐसी ही दूसरी बुरी आदतों से बचनेे वालों को जन्नत नसीब होगी।
गिलमा आशक्त होंगे अर्थात महिलाओं को इन सेवकों से खतरा नहीं होगा दूसरी बात गिलमा सेवक मर्द जाती से होंगे इस मामले में भी महिलाओं के लिए गर्व की बात है

Alleged "72 virgins"
कुरआन में 72 हूरों का जिकर नहीं है,  अनुवाद में भी नहीं, हदीस की किताब सही बुखारी व सही मुस्लिम में भी नहीं, मुफस्सिर अबु इसा मुहम्‍मद व इब्‍ने खातिर ने कुरआन की नीचे दी गयी आयत के अनुवाद पर अपनी तफसीर (व्‍याख्‍या) में यह खयाल शुरू किया था
कुरआन की आयत यह है जिस में जन्‍नत के बाग, हूर, और दूसरी सुख सुविधायें बतायी जा रही है
''उन (अनुकम्पाओं) में निगाह बचाए रखनेवाली (सुन्दर) स्त्रियाँ होंगी, जिन्हें उनसे पहले न किसी मनुष्य ने हाथ लगाया और न किसी जिन्न ने फिर तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे?'' http://tanzil.net/#trans/hi.farooq/55:56


महिलाओं को जन्‍नत में क्‍या मिलेगा?
          ''मां के कदमों के नीचे जन्‍नत'' मशहूर हदीस है, इस हदीस के मुताबिक महिला पुरूष दोनों पर जन्‍नत में जाने के लिए मां की सेवा लाजिमी हो गयी,  जो चीज हो ही उनके पांव के नीचे फिर भी प्रश्‍न किया जाए कि उन्‍हें जन्‍नत में क्‍या मिलेगा, मां, बहन या बीवी से प्रश्‍न करके देखें क्‍या वो बता पायेंगी  कि जन्‍न्‍त में वो क्‍या चाहती हैं? बेशक नहीं बता पायेंगी, क्‍यूंकि अगर यह तफसील लिखी हो या फिर कोई कहे तो बेहयाई और बेशर्मी की बात होगी, कुरआन छोटे बडे सब पढते हैं, अकेले और इकटठे भी पढते हैं अगर औरतों को जन्‍नत में मिलने वाली बातों का जिकर आए तो शायद पढने सुनने वाले के लिए मुश्‍किल होती,,,इस लिए अल्‍लाह ने बहुत ही अच्‍छे तरीके से कुरआन में उनको तसल्‍ली दी है,  अल्‍लाह उनकी आवश्‍यकताओं को समझता है इसी लिए उसने दोनों लिंग वालों से विस्‍तार से कहा है कि
 ''........अल्लाह को अधिक याद करनेवाले पुरुष और याद करनेवाली स्त्रियाँ - - इनके लिए अल्लाह ने क्षमा और बड़ा प्रतिदान तैयार कर रखा है [कुरआन 33:35],'' 
 पवित्र पैग़म्बर मुहम्मद (स.) ने फ़रमाया कि,
"अल्लाह ने अपने मानने वालो के लिए ऐसा बदला तैयार किया है जो किसी आँख ने देखा नहीं और कान ने सुना नहीं है. यहाँ तक कि इंसान का दिल कल्पना भी नहीं कर सकता है." (सही बुखारी (Sahih Bukhari :Volume 9, Book 93, Number 589, (English 7498)
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more 
 http://www.new-muslims.info/hin/इस्लाम-की-मूल-आस्था/जन्नत-और-जहन्नम/जन्नत-की-कुछ-नेमतों-की-कुछ/

https://ayesha5.wordpress.com/2009/09/29/the-concept-of-hoor/