Wednesday, August 17, 2016

मुहम्मद लिखते पढ़ते नहीं थे इस (क़ुरआन) से पहले

मुहम्‍म्‍द सल्‍ल. को अनपढ समझने वाले जान लें कि कुरआन की बातों को सबसे बहतर कुरआन ही से जाना जा सकता है,  मुहम्‍मद सल्‍ल. की पढाई लिखाई  illiteracy बारे में विभिन्‍न आयतों से बात साफ हो जाती है, जैसे किः

 और (ऐ रसूल) क़ुरआन से पहले न तो तुम कोई किताब ही पढ़ते थे और न अपने हाथ से तुम लिखा करते थे ऐसा होता तो ये झूठे ज़रुर (तुम्हारी नबुवत में) शक करते (कुरआन 29:48) 
 और कहतेः
"ये अगलों की कहानियाँ है, जिनको उसने लिख लिया है तो वही उसके पास प्रभात काल और सन्ध्या समय लिखाई जाती है।" (कुरआन25:5)
आपकी परवरिश अपनों के बीच हुयी, आपके बारे में वो देखते आ रहे थे,  जानते थे कि आप लिखते पढते ना थे,  अल्लाह ने क़ुरआन का अग़ाज़ पेगम्‍बर मुहम्‍मद सल्‍ल. को कंठस्‍थ कराने का सिलसिला अपने फरिश्‍ते द्वारा शब्द इक़रा अर्थात पढ़ो से कराया।
Iqra! – The First Lesson of the Qur’an
"Read: In the name of thy Lord Who createth", (96:1)
   अपने परवरदिगार का नाम लेकर पढ़ो जिसने हर (चीज़ को) पैदा किया (96:1)


वही है जिसने उम्मियों में उन्हीं में से एक रसूल उठाया जो उन्हें उसकी आयतें पढ़कर सुनाता है, उन्हें निखारता है और उन्हें किताब और हिकमत (तत्वदर्शिता) की शिक्षा देता है, यद्यपि इससे पहले तो वे खुली हुई गुमराही में पड़े हुए थे, - (62:2)

 जिसने क़लम के ज़रिए तालीम दी (96:4) उसीने इन्सान को वह बातें बतायीं जिनको वह कुछ जानता ही न था(96:5)

 उसका जमा कर देना और पढ़वा देना तो यक़ीनी हमारे ज़िम्मे है (75:17)
ummi :
 कुरआन में उम्मी शब्‍द का अर्थ अनपढ़ नहीं बल्कि बिना ईश्वरीय किताब वाले से है जैसा कि यहूदी कहते थे कि हम ईश्वरीय किताब(बाईबल) वाले हैं और अरबों पर कोई किताब नहीं आई इसलिए यह उम्मी हैं।
"अब यदि वे तुमसे झगड़े तो कह दो, "मैंने और मेरे अनुयायियों ने तो अपने आपको अल्लाह के हवाले कर दिया हैं।" और जिन्हें किताब मिली थी और जिनके पास किताब नहीं है(ummi), उनसे कहो, "क्या तुम भी इस्लाम को अपनाते हो?" यदि वे इस्लाम को अंगीकार कर लें तो सीधा मार्ग पर गए। और यदि मुँह मोड़े तो तुमपर केवल (संदेश) पहुँचा देने की ज़िम्मेदारी है। और अल्लाह स्वयं बन्दों को देख रहा है (3:20)
उम्मुल्कुरा अर्थात बिना ईश्वरीय पुस्तक वालों की बस्ती का मरकज /सेंटर मक्का जिसे इंग्लिश में Mother of Cities कहते हैं। इस आयत को पढ़ें
"उसके बाद उन्हें छोड़ के (पडे झक मारा करें (और) अपनी तू तू मै मै में खेलते फिरें और (क़ुरआन) भी वह किताब है जिसे हमने बाबरकत नाज़िल किया और उस किताब की तसदीक़ करती है जो उसके सामने (पहले से) मौजूद है और (इस वास्ते नाज़िल किया है) ताकि तुम उसके ज़रिए से अहले मक्का (ummul qura) और उसके एतराफ़ के रहने वालों को (ख़ौफ ख़ुदा से) डराओ और जो लोग आख़िरत पर ईमान रखते हैं वह तो उस पर (बे ताम्मुल) ईमान लाते है और वही अपनी अपनी नमाज़ में भी पाबन्दी करते हैं "(6:92) 
उम्मी शब्‍द यहूदी बतोर तहकीर तुच्छ  के लिए किया करते थे,  कुरआन में उम्‍मी शब्‍द बतौर फखर के इस्‍तेमाल हुआ, अगर इसका अर्थ अगर अनपढ ही होता तो मक्‍का की उम्मुल्कुरा युनिवर्सिटी का नाम कुछ और होता
 
सुल्हे हुदैबिया में साबित है कि वो पढ़ना जान चुके थे वरना वो रसूल अल्लाह के बजाये कोई दूसरा शब्द काट देते और लिखना भी जान चुके थे उन्होंने इब्ने अबदुल्लाह लिखा था। 
मुहम्मद सल्लल्लाहु अलेही वसल्लम की नजर में लिखने पढ़ने की अहमियत इस बात से भी पता चलती है कि जंगे बदर में कैदियों को इस शर्त पर छोड़ा था कि वह कुछ मुसलमानों को लिखना पढ़ना सिखाएंगे।
           उपरोक्‍त बातों से बात साफ हो जाती है मुहम्‍मद सल्‍ल. कुरआन के अवतरित होने से पहले लिखते पढते नहीं थे और अल्‍लाह ने अपने पेगम्‍बर को शिक्षित किया।
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The Quranic word on which they proclaimed Muhammad's illiteracy was the word "ummi." They claimed that this Quranic word, which is spoken about Muhammad in the Quran, means illiterate! However, and contrary to their claims, the use of this word in the Quran consistently denotes the meaning of "gentile," or one who has never received a scripture [see 2:78, 3:20, 3:75, 62:2). The word "ummi" is never used in the Quran to mean "illiterate."
For the Quranic definition of the word "ummi" please see the following page:
The word "ummi" in the Quran


http://www.quran-islam.org/main_topics/misinterpreted_verses/ummy_(P1231).html

The issue of Muhammad's illiteracy
http://www.quran-islam.org/main_topics/new_information/muhammad_%28P1259%29.html

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